ब्रेस्ट में दर्द हो तो क्या करे?HealthPlanet

Posted on Wed 30th Nov 2022 : 16:23

ब्रेस्ट में अचानक होने वाले दर्द से डरें नहीं, जानें क्या हैं कारण और कैसे मिलेगी राहत
आजकल ब्रेस्ट में हल्का सा भी दर्द हो तो मन में सबसे पहला ख्याल ब्रेस्ट कैंसर का आता है। अगर आपने भी कभी ब्रेस्ट में हल्का या तेज दर्द महसूस किया है और ब्रेस्ट कैंसर होने का डर आपके दिमाग में आया हो, तो जानिए क्यों होता है ब्रेस्ट में पेन और इससे जुड़ी सभी बातें।
क्या है ब्रेस्ट पेन

प्यूबर्टी के दौरान शरीर में एस्ट्रोजन में वृद्धि होने लगती और इसी वजह से ब्रेस्ट (स्तन) विकसित होते हैं। मेन्सट्रुअल साइकल ( मासिक धर्म चक्र) के दौरान कई तरह के हार्मोन की वजह से ब्रेस्ट टिशू (ऊतकों ) में बदलाव आते हैं जिससे कुछ महिलाओं को दर्द होने की संभावना रहती है। इसलिए कभी-कभी ब्रेस्ट में होने वाले दर्द को आम माना गया है। ब्रेस्ट पेन को मास्टलगिया के नाम से भी जाना जाता है। इसमें ब्रेस्ट में हल्का-हल्का दर्द, छूने पर दर्द, चुभन या तीखा दर्द महिलाओं में एक सामान्य स्थिति है। मस्तालगिया की तीव्रता तेज दर्द से लेकर हल्की झुनझुनी तक भिन्न हो सकती है। कुछ महिलाओं को स्तन कोमलता का अनुभव हो सकता है, या उनके स्तन सामान्य से अधिक भरे हुए महसूस कर सकते हैं।
दो तरह के होते हैं ये दर्द

ब्रेस्ट में होने वाले दर्द को आमतौर पर साइक्लिक या नॉन साइक्लिक के रूप में बांटा गया है।
1. साइक्लिक(चक्रीय)

साइक्लिक दर्द का मतलब है कि दर्द आपके मासिक धर्म से जुड़ा है। मासिक धर्म चक्र से जुड़ा दर्द आपकी पीरियड के दौरान या बाद में कम हो जाता है।
2. नॉ
न साइक्लिक (गैर-चक्रीय)

नॉन साइक्लिक दर्द के कई कारण हो सकते हैं, जिसमें स्तन पर चोट लगना भी शामिल है। कभी-कभी ऐसा दर्द ब्रेस्ट के बजाय आसपास की मांसपेशियों या टिशू से आ सकता है।साइक्लिक दर्द की तुलना में ऐसा दर्द हमेशा नहीं होता, और अगर हो रहा है तो इसके कारणों की पहचान करना कठिन हो सकता है।
ब्रेस्ट में दर्द के कारण

ब्रेस्ट में होने वाले दर्द के कई कारण हो सकते हैं। हालांकि इसके लिए दो मुख्य कारण हैं। पहला है हार्मोन का स्तर घटना बढ़ना और दूसरा है फाइब्रोसिस्टिक ब्रेस्ट।
1. हार्मोन की वजह से परेशानी

मासिक धर्म की वजह से महिलाओं के शरीर में प्रोजेस्टरॉन और एस्ट्रोजेन का स्तर घटने-बढ़ने लगता है। ये दोनो्ं हार्मोन महिलाओं में ब्रेस्ट के सूजन, गांठ बनने या दर्द का कारण बन जाते हैं। उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं में ये दर्द बढ़ने की आशंका रहती है, क्योंकि उम्र के साथ शरीर हार्मोन के अधिक या कम होने पर ज्यादा संवेदनशील हो जाता है। कई बार इस तरह का दर्द मेनोपॉज के बाद बंद हो जाता है।

यदि स्तन दर्द हार्मोन के उतार-चढ़ाव के कारण होता है, तो आप आमतौर पर अपने मासिक धर्म से दो से तीन दिन पहले ये दर्द बढ़ सकता है। कभी-कभी दर्द आपके पूरे मासिक धर्म के दौरान बना रह सकता है।
क्या कर सकते हैं-

यह समझने के लिए कि स्तन दर्द का कारण मासिक धर्म चक्र है या नहीं, अपने मासिक धर्म का एक लॉग मेंटेन करना चाहिए और नोट करें कि आपको पूरे महीने दर्द कब- कब होता है। एक या दो चक्र के बाद ही आपको दर्द का पैटर्न समझ में आ जाएगा।

शरीर में किसी भी तरह का बदलाव जैसे प्यूबर्टी (यौवन), गर्भावस्था और मेनोपॉज़ मासिक धर्म को प्रभावित करता है और इसका असर ब्रेस्ट टिशू पर पड़ता है और दर्द हो सकता है।
2. सिस्ट

महिलाओं की उम्र बढ़ने के साथ, उनके स्तनों में परिवर्तन होने लगता है, इसे इनवॉल्यूशन कहा जाता है। यह तब होता है जब स्तन के टिशू की जगह फैट ले लेता है। इसके साइड इफेक्ट के रूप में ब्रस्ट में सिस्ट बनते हैं और अधिक रेशेदार टिशू का विकास होने लगता है। इन्हें फाइब्रोसिस्टिक चेंज या फाइब्रोसिस्टिक ब्रेस्ट टिशू कहा जाता है। हालांकि फाइब्रोसिस्टिक ब्रेस्ट की वजह से दर्द हो ये जरूरी नहीं, क्योंकि ये उम्र के साथ होने वाले बदलावों में शामिल है। लेकिन कभी-कभी ये दर्द का कारण बन सकते हैं।

फाइब्रोसिस्टिक ब्रेस्ट गांठ की तरह महसूस हो सकते हैं या छूने पर कोमल महसूस हो सकते हैं। ऐसा ज्यादातर ब्रेस्ट के ऊपरी या बाहरी हिस्सों में होता है। ये गांठ मासिक घर्म के समय आकार में बड़े भी हो सकते हैं।
ब्रेस्टफीडिंग से भी होता है दर्द

स्तनपान आपके शिशु को खिलाने का एक प्राकृतिक और पौष्टिक तरीका है, लेकिन इसके कई नुकसान भी हैं। आप कई कारणों से स्तनपान करते समय स्तन में दर्द का अनुभव कर सकती हैं। इस दर्द के ये कारण हो सकते हैं-
1. स्तन में सूजन

स्तन में सूजन, जिसे मास्टिटिस भी कहा जाता है, दूध नलिकाओं का संक्रमण है। इसमें गंभीर और तेज दर्द के साथ-साथ निपल्स का फटना, खुजली, जलन या फफोले हो सकते हैं। अन्य लक्षणों में स्तनों पर लाल धारियां, बुखार और ठंड लगना शामिल हैं। आप डॉक्टर से एंटीबायोटिक दवाएं लेकर इनका इलाज करवा सकती हैं।
2. इंगोर्जमेंट यानी स्तन का पूरी तरह से भरा होना-

जब ब्रेस्ट पूरी तरह से भर जाते हैं तो इंगोर्जमेंट होता है। स्तन बढ़े हुए दिखाई देने लगते हैं और त्वचा टाइट हो जाती है।दर्द भी होने लगता है। यदि आप जल्द ही अपने बच्चे को दूध नहीं पिला सकती हैं, तो आप अपने दूध को पंप करके या मैन्युअल रूप से दूध निकालने का प्रयास करें।
3. गलत तरीके से बच्चे का निपल्स पकड़ना

यदि आपका शिशु आपके निप्पल को ठीक से नहीं पकड़ रहा है, तो आपको स्तन दर्द का अनुभव होने की संभावना है। हो सकता है कि आपका शिशु ठीक तरह से लैच नहीं कर रहा हो, इसके संकेतों में निप्पल का फटना और निप्पल में दर्द शामिल हैं।

याद रखें कि स्तनपान सही तरह से कराने से किसी तरह से चोट नहीं लगती। अगर आपको स्तनपान कराने में दिक्कत आ रही हो, तो घर में किसी बड़े-बुजुर्ग की सहायता लें। आप अपनी डॉक्टर या किसी प्रशिक्षित नर्स से भी मदद मांग सकती हैं।
अन्य कारण
1.आहार

एक महिला जो खाद्य पदार्थ खाती है वह स्तन दर्द में योगदान कर सकती है। जो महिलाएं अस्वास्थ्यकर आहार लेती हैं, जैसे कि वसा और परिष्कृत कार्ब्स में उच्च, उन्हें भी स्तन दर्द का अधिक खतरा हो सकता है।
2. छाती, हाथ या पीठ

कभी-कभी स्तन दर्द स्तन की किसी परेशानी की वजह से न होकर छाती, हाथ या पीठ की मांसपेशियों में परेशानी के कारण होता है। यदि आप रेकिंग, रोइंग, फावड़ा और वाटरस्कीइंग जैसी एक्टिविटी करते हैं तो यह सामान्य है।
3. स्तन का आकार

बड़े आकार के ब्रेस्ट होने पर शरीर के आकार की मात्रा में बड़े स्तन होने पर महिलाओं को गर्दन और कंधों में परेशानी का अनुभव हो सकता है।
4. स्तन सर्जरी

यदि आपके स्तनों की सर्जरी हुई है, तो स्टिच के ठीक होने के बाद जो स्कार टिशू होते हैं वो दर्द का कारण बन सकते है।
5. दवाएं

एंटीडिप्रेसेंट, हार्मोन थेरेपी, एंटीबायोटिक्स और हृदय रोग की दवाएं सभी स्तन दर्द में योगदान कर सकती हैं। जबकि आपको स्तन दर्द होने पर इन दवाओं को लेना बंद नहीं करना चाहिए, विकल्प की उपलब्धता पर अपने डॉक्टर से बात करें।
6. धूम्रपान-

धूम्रपान से स्तन के टिशू में एपिनेफ्रीन का स्तर बढ़ जाता है। इससे महिला के स्तनों में दर्द होने लगता है।

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